Gyanesh Kumar इस समय चुनाव आयोग Election Commission और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं। 26 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की पूर्ण बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया, Form-6, ECINet, मतदाताओं की सुनवाई और आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सार्वजनिक किए।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक दिन पहले The Indian Express ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form-6, मतदाता सूची, ECINet और IT व्यवस्था सहित कई विषयों का उल्लेख किया गया।
लेकिन पूरे मामले को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि Gyanesh Kumar और चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से क्या कहा, Indian Express ने क्या रिपोर्ट किया और 26 सितंबर की बैठक में वास्तव में कौन-कौन से फैसले हुए।
Gyanesh Kumar: 26 सितंबर की पूर्ण बैठक क्यों बनी चर्चा का केंद्र?
26 सितंबर को निर्वाचन सदन में आयोग की पूर्ण बैठक हुई। आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार बैठक दोपहर 3 बजे हुई और इसमें लिए गए फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त थी।
बैठक में Gyanesh Kumar के साथ Election Commissioners Dr. Sukhbir Singh Sandhu और Dr. Vivek Joshi मौजूद थे। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट भी इन तीनों को वर्तमान Commission के रूप में सूचीबद्ध करती है।
Gyanesh Kumar: बैठक से पहले क्या था विवाद?
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार संधू और जोशी ने कई मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि ये आपत्तियां मतदाता जोड़ने, नाम हटाने, अपील, electoral roll की सुरक्षा और IT/software से जुड़े मुद्दों पर थीं।
Gyanesh Kumar: Form-6 विवाद में क्या सामने आया?
Indian Express ने रिपोर्ट किया कि ECINet पर Form-6 के साथ SIR से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा दिखाई गई थी, जिसमें नए मतदाता से पुराने SIR electoral roll में उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों Election Commissioners ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई।
Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग ने Form-6 पर क्या सफाई दी?
24 सितंबर को चुनाव आयोग ने कहा था कि Form-6 को बदला नहीं गया, बल्कि SIR के तहत एक अतिरिक्त declaration/annexure जोड़ा गया है। आयोग के अनुसार ERO के पास electoral roll तैयार करने और उसमें सुधार करने का अधिकार बना हुआ है तथा ECINet एक facilitating platform है।
Gyanesh Kumar: 26 सितंबर को Form-6 पर क्या नया कहा गया?
26 सितंबर के आधिकारिक प्रेस नोट में आयोग ने कहा कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाया गया declaration सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है, जबकि non-SIR period में Registration of Electors Rules, 1960 के अनुसार लागू Forms इस्तेमाल किए जाएंगे।
Gyanesh Kumar: ECINet को लेकर अब होगी स्वतंत्र समीक्षा
इस पूरे विवाद में ECINet सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक बनकर सामने आया है। जनवरी 2026 में चुनाव आयोग ने ECINET को एक integrated digital platform के रूप में लॉन्च किया था। PIB के अनुसार इसे Gyanesh Kumar, Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi की परिकल्पना के तहत विकसित किया गया था और यह विभिन्न चुनावी सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है।
Gyanesh Kumar: ECINet पर Election Commission का नया फैसला क्या है?
26 सितंबर के प्रेस नोट में आयोग ने कहा कि field officers को उनकी statutory powers के अनुरूप role-based access दिया गया है। इसके साथ ECINet की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया गया है।
Gyanesh Kumar: ECINet Review Committee में कौन होगा?
आयोग के मुताबिक समिति की अध्यक्षता Senior Deputy Election Commissioner करेंगे और इसमें IIT/IIIT का एक independent expert भी शामिल होगा। समिति यह जांचेगी कि ECINet Acts और Rules के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को देगी।
Gyanesh Kumar: IT Modules पर भी बदली प्रक्रिया
आयोग ने कहा कि भविष्य में IT modules और portals से जुड़ी नई initiatives को पहले Committee of Officers यानी COO में चर्चा के लिए रखा जाएगा और इसके बाद Commission approval की प्रक्रिया होगी।
Gyanesh Kumar: ECINet Review क्यों महत्वपूर्ण है?
इसका महत्व इसलिए है क्योंकि विवाद का एक हिस्सा इस सवाल से जुड़ा रहा है कि electoral roll से संबंधित निर्णयों में तकनीकी प्रणाली और वैधानिक अधिकारियों की भूमिका का तालमेल कैसे सुनिश्चित किया जाए।
आयोग का नया फैसला कम-से-कम इतना स्पष्ट करता है कि ECINet की compliance review अब औपचारिक रूप से की जाएगी। इसका अंतिम निष्कर्ष समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gyanesh Kumar: SIR Notice पाने वालों को घर पर मिलेगी सुविधा
26 सितंबर की बैठक में SIR से जुड़े नोटिस की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा हुई।
Gyanesh Kumar: BLO अब मतदाता के घर क्यों जाएगा?
आयोग ने कहा कि जिन लोगों को SIR के दौरान unmapped या logical discrepancies के आधार पर नोटिस दिया गया है, उनके घर BLO जाएगा और आवश्यक documents एकत्र करेगा। इसके बाद दस्तावेज ECINet पर अपलोड किए जाएंगे और संबंधित ERO निर्णय करेगा।
Gyanesh Kumar: क्या अब हर मतदाता को ERO Office जाना होगा?
आयोग के अनुसार ऐसे लोगों को सामान्य तौर पर ERO/AERO कार्यालय में hearing के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल exceptional circumstances में hearing होगी।
Gyanesh Kumar: Online Hearing की क्या व्यवस्था होगी?
यदि hearing आवश्यक होती है तो उसे preferably online आयोजित किया जाएगा। आयोग ने online hearing facilities को मजबूत करने की बात भी कही है।
Gyanesh Kumar: परिवार का वयस्क सदस्य कब सुनवाई में जा सकता है?
आयोग ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर elector अपने परिवार के किसी adult member को अपनी ओर से hearing में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है।
Gyanesh Kumar: गरीब, मजदूर और बेघर मतदाताओं के लिए Special Camps
SIR प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं की भी चिंता सामने आती रही है जिनके पास दस्तावेज उपलब्ध कराने या सरकारी कार्यालय तक पहुंचने में व्यावहारिक कठिनाइयां हो सकती हैं।
Gyanesh Kumar: Help Desk और Special Camps क्यों बनाए जाएंगे?
चुनाव आयोग ने District Election Officers को night shelters, labourers, poor people और homeless लोगों के लिए आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त help desks और special camps लगाने का निर्देश दिया है।
Gyanesh Kumar: क्या यह SIR के मूल आदेश में बदलाव है?
इसे मूल SIR order की समाप्ति या वापसी के रूप में प्रस्तुत करना आधिकारिक दस्तावेज से समर्थित नहीं है। यह SIR की implementation और voter facilitation से जुड़ा नया procedural decision है।
Gyanesh Kumar: SIR के मूल आदेश पर आयोग का क्या कहना है?
आयोग ने फिर दोहराया कि 24 जून 2025 का SIR order सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए आयोग की unanimous approval से जारी हुआ था। आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में इसे बरकरार रखा।
Gyanesh Kumar: क्या SIR वापस लिया गया?
26 सितंबर के आधिकारिक प्रेस नोट में SIR वापस लेने की घोषणा नहीं है। इसके विपरीत आयोग ने SIR के मूल आदेश और उसके schedules को unanimous approval से जारी बताया है।
Gyanesh Kumar: Delhi और Maharashtra में Claims और Objections की Deadline बढ़ी
पूर्ण बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए claims और objections की समय-सीमा भी बढ़ाई गई।
Gyanesh Kumar: Delhi में नई तारीख क्या है?
आयोग ने Delhi में claims और objections दाखिल करने की अवधि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई है। Notices तथा claims और objections के disposal की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 रखी गई है।
Gyanesh Kumar: Maharashtra में नई Deadline क्या है?
Maharashtra में claims और objections दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और disposal की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 की गई है।
Gyanesh Kumar: Deadline क्यों बढ़ाई गई?
आयोग के अनुसार Delhi और Maharashtra के Chief Electoral Officers की ओर से अनुरोध प्राप्त हुए थे। उन्हीं अनुरोधों के आधार पर समय-सीमा बढ़ाई गई।
Gyanesh Kumar: मतदाताओं के लिए इसका क्या अर्थ है?
इसका सीधा अर्थ है कि संबंधित मतदाताओं को claims और objections दाखिल करने तथा संबंधित मामलों के disposal के लिए अतिरिक्त समय मिला है।
Gyanesh Kumar: Commission की Internal Functioning में भी बदलाव
26 सितंबर की बैठक में केवल SIR और ECINet पर ही फैसले नहीं हुए। आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े कई निर्देश भी जारी किए।
Gyanesh Kumar: Meeting Agenda और Minutes को लेकर क्या फैसला हुआ?
आयोग ने कहा कि सभी Commission meetings का agenda पहले circulate किया जाएगा और minutes जारी किए जाएंगे।
Gyanesh Kumar: Commissioners के Directions पर क्या कहा गया?
प्रेस नोट के मुताबिक Commissioners द्वारा अधिकारियों को दिए गए सभी directions का meticulously compliance किया जाएगा।
Gyanesh Kumar: Officers के APAR और Foreign Trips पर क्या निर्देश हैं?
आयोग ने कहा कि सभी अधिकारियों के APAR हर साल 31 दिसंबर तक निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएंगे। Foreign trips के लिए Commission approval लिया जाएगा।
Gyanesh Kumar: इन फैसलों को विवाद के संदर्भ में क्यों देखा जा रहा है?
क्योंकि Indian Express की रिपोर्ट में Commission के भीतर decision-making और अधिकारियों को लेकर आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। 26 सितंबर के प्रेस नोट में agenda, minutes और Commissioners के directions के पालन जैसे administrative measures का स्पष्ट उल्लेख आया।
यह समानता महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि ये फैसले किसी एक मीडिया रिपोर्ट के कारण ही लिए गए।
Gyanesh Kumar: Cabinet Secretary Letter पर Election Commission का स्पष्टीकरण
Indian Express की रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि दोनों Election Commissioners ने Cabinet Secretary को पत्र लिखकर कुछ प्रशासनिक और IT संबंधी मुद्दों पर चिंता जताई थी।
Gyanesh Kumar: Cabinet Secretary को भेजे पत्र को आयोग ने कैसे समझाया?
26 सितंबर को आयोग ने कहा कि Cabinet Secretary को भेजा गया letter Commission या IT division की किसी policy से संबंधित नहीं था, बल्कि ECI में deputation पर आए एक officer के working से संबंधित था।
Gyanesh Kumar: Work Redistribution Orders पर आयोग ने क्या कहा?
आयोग के अनुसार संबंधित officer द्वारा जारी work redistribution orders को दो Commissioners के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि IT division पर DEC की oversight कभी वास्तव में वापस नहीं ली गई।
Gyanesh Kumar: क्या यह Internal Rift का आधिकारिक प्रमाण है?
आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में SIR से जुड़े फैसलों को unanimous बताया है। वहीं Indian Express ने अलग-अलग औपचारिक आपत्तियों की रिपोर्ट की है। दोनों तथ्यों को एक साथ रखते हुए यह कहना अधिक सटीक होगा कि कुछ फैसलों पर reported differences और formal objections की रिपोर्ट हुई, जबकि आयोग का आधिकारिक रुख यह है कि उसके प्रमुख SIR फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
Gyanesh Kumar: 14 आपत्तियों के बाद क्या बदला?
यह सवाल अभी सबसे ज्यादा चर्चा में है।
Gyanesh Kumar: Indian Express की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार संधू और जोशी ने कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें Form-6, electoral roll changes, appeals, ECINet और IT से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
Gyanesh Kumar: 26 सितंबर के फैसलों में कौन-से विषय सामने आए?
पूर्ण आयोग के फैसलों में—
- SIR notices के लिए doorstep document collection
- Exceptional cases में online hearing
- Help desks और special camps
- Form-6 declaration पर clarification
- ECINet का independent expert review
- Field officers के role-based access
- IT modules की नई approval process
- Delhi और Maharashtra में deadline extension
- Commission meetings के agenda और minutes
- Commissioners के directions के compliance
जैसे मुद्दे शामिल रहे।
Gyanesh Kumar: क्या 14ों आपत्तियों का समाधान हो गया?
यह कहना अभी उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज से साबित नहीं होता। आयोग के प्रेस नोट में 14 आपत्तियों की point-by-point सूची नहीं दी गई है और यह नहीं कहा गया है कि उन सभी का समाधान कर दिया गया।
Gyanesh Kumar: फिर 26 सितंबर की बैठक को कैसे समझें?
इसे इस तरह समझना ज्यादा सटीक होगा कि रिपोर्टेड विवाद के अगले दिन पूर्ण आयोग की बैठक में उन्हीं व्यापक क्षेत्रों से जुड़े कई procedural और administrative फैसले सार्वजनिक हुए।
Gyanesh Kumar: Goa के 97 मतदाताओं का मामला
Goa का मामला भी इस पूरे विवाद में खास महत्व रखता है।
Gyanesh Kumar: 97 मतदाताओं को लेकर क्या मामला था?
मीडिया रिपोर्टों में Goa के 97 मतदाताओं के मामले को electoral roll और ECINet की प्रक्रिया से जोड़कर उठाया गया। AajTak ने 24 सितंबर को रिपोर्ट किया था कि आयोग से इस मामले और ERO की भूमिका पर सवाल पूछे गए थे।
Gyanesh Kumar: आयोग ने Goa के मामले में अब क्या किया?
26 सितंबर के आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार Goa के CEO ने संबंधित BLOs को left-out voters के घर जाकर forms collect करने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि 97 में से 81 मतदाता Form-6 भर चुके हैं।
Gyanesh Kumar: क्या यह मामला अब खत्म हो गया?
कम-से-कम 81 मतदाताओं के Form-6 भरने की जानकारी आयोग ने दी है। लेकिन पूरे मामले की अंतिम स्थिति का आकलन करने के लिए आगे की official action और electoral roll update देखना होगा।
Gyanesh Kumar: Goa मामले से क्या संदेश मिलता है?
यह दिखाता है कि SIR की प्रक्रिया केवल दिल्ली या Kolkata जैसे बड़े राजनीतिक केंद्रों तक सीमित नहीं है; इसका असर स्थानीय स्तर पर voter enrolment और electoral roll correction की प्रक्रियाओं पर भी पड़ रहा है।
Gyanesh Kumar: SIR में छूटे मतदाताओं के लिए क्या रास्ता है?
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR में नाम छूट जाने पर प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं होती।
Gyanesh Kumar: Continuous Updation से नाम कैसे जुड़ सकता है?
आयोग के अनुसार SIR 20 States/UTs में पूरा हो चुका है, जिनमें Bihar और West Bengal भी शामिल हैं। जिन लोगों के नाम SIR के दौरान या उसके बाद छूट गए हैं, वे संबंधित ERO के पास continuous updation प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
Gyanesh Kumar: First-Time Voters के लिए क्या व्यवस्था है?
आयोग ने young और first-time voters को भी विशेष रूप से शामिल किया है और CEOs, DEOs तथा EROs को ऐसे मतदाताओं के enrollment के लिए special drive चलाने के निर्देश दिए हैं।
Gyanesh Kumar: क्या SIR के बाद भी नाम जोड़ा जा सकता है?
आयोग के अनुसार हां, continuous updation के तहत eligible voters inclusion के लिए आवेदन कर सकते हैं।
Gyanesh Kumar: यह व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि electoral roll revision के दौरान किसी eligible citizen का नाम छूट जाने की स्थिति में उसके पास inclusion के लिए वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध रहती है।
Gyanesh Kumar: कौन हैं भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त?
अब सवाल यह भी है कि Gyanesh Kumar कौन हैं और उनका प्रशासनिक सफर क्या रहा है?
Gyanesh Kumar: Chief Election Commissioner कब बने?
Election Commission की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार Gyanesh Kumar ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें Chief Election Commissioner के रूप में कार्यभार संभाला। वे 1988 बैच के Kerala cadre के IAS अधिकारी हैं।
Gyanesh Kumar: उनका प्रशासनिक अनुभव क्या रहा है?
ECI की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। केंद्र में वे Ministry of Defence में Joint Secretary, Ministry of Home Affairs में Additional Secretary तथा Ministry of Parliamentary Affairs और Ministry of Cooperation में Secretary रहे।
Gyanesh Kumar: Kerala में किन पदों पर रहे?
आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार Kerala में उन्होंने Finance Resources, Public Works Department और Food, Civil Supplies & Consumer Affairs जैसे विभागों में काम किया। वे Ernakulam के District Collector और Cochin Corporation के Municipal Commissioner भी रहे।
Gyanesh Kumar: उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?
ECI के अनुसार Gyanesh Kumar ने IIT Kanpur से Civil Engineering में B.Tech किया है। उन्होंने Business Finance और Environmental Economics का भी अध्ययन किया है।
Gyanesh Kumar: ECINET से लेकर SIR तक उनकी भूमिका क्यों चर्चा में है?
Gyanesh Kumar के कार्यकाल में चुनाव आयोग के कामकाज में technology और digital platforms का महत्व भी बढ़ा है।
Gyanesh Kumar: ECINET कब लॉन्च हुआ?
PIB के अनुसार ECINET को जनवरी 2026 में लॉन्च किया गया था और इसे चुनाव से जुड़ी विभिन्न सेवाओं को एक integrated digital platform पर लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया।
Gyanesh Kumar: ECINET में कितने Apps और Portals जुड़े हैं?
PIB के अनुसार ECINET ने ECI के 40 से अधिक apps और portals को एक platform पर integrate किया है। आयोग ने इसे electoral services के लिए व्यापक digital platform के रूप में प्रस्तुत किया है।
Gyanesh Kumar: SIR और ECINET का संबंध क्या है?
SIR के दौरान electoral roll से जुड़े documents और data processing के लिए digital systems की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इसी वजह से ECINet की access, role-based permissions और technical functioning पर उठे सवाल इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं।
Gyanesh Kumar: अब ECINet Review का क्या इंतजार रहेगा?
सबसे महत्वपूर्ण अगला दस्तावेज ECINet Review Committee की रिपोर्ट होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि review में system की legal और regulatory compliance को लेकर क्या निष्कर्ष निकलते हैं।
Gyanesh Kumar: निष्कर्ष—अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
Gyanesh Kumar को लेकर मौजूदा विवाद को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड में तीन अलग-अलग स्तर दिखाई देते हैं।
पहला, Indian Express की रिपोर्ट है, जिसमें दो Election Commissioners द्वारा कम-से-कम 14 formal objections की बात कही गई है।
दूसरा, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है, जिसमें SIR के प्रमुख आदेशों को unanimous approval से जारी किया गया बताया गया है।
तीसरा, 26 सितंबर की पूर्ण बैठक के बाद सामने आए नए procedural फैसले हैं—BLO द्वारा घर पर दस्तावेज लेना, exceptional cases में online hearing, ECINet review, IT initiatives की नई approval process और Delhi-Maharashtra में deadline extension।
इसलिए Gyanesh Kumar से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि किसी एक पक्ष की headline क्या कहती है, बल्कि यह है कि reported objections और 26 सितंबर के नए फैसलों के बीच वास्तविक दस्तावेजी संबंध क्या है और आगे ECINet Review Committee की रिपोर्ट क्या निष्कर्ष देती है।
फिलहाल आधिकारिक रिकॉर्ड यह नहीं कहता कि चुनाव आयोग ने अपना मूल SIR आदेश वापस ले लिया है। वहीं यह भी तथ्य है कि 26 सितंबर की बैठक में SIR की कई प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव और स्पष्टीकरण घोषित किए गए हैं। यही दोनों तथ्य मिलकर Gyanesh Kumar और Election Commission SIR controversy को आगे भी खबरों के केंद्र में बनाए रखेंगे।
Gyanesh Kumar: आगे किन फैसलों पर रहेगी नजर?
आगे तीन चीजें विशेष रूप से महत्वपूर्ण होंगी:
- ECINet Review Committee की रिपोर्ट
- SIR के तहत Claims और Objections का disposal
- Reported formal objections पर आगे की आधिकारिक कार्रवाई
इन तीनों से यह अधिक स्पष्ट होगा कि 26 सितंबर की बैठक केवल procedural clarification थी या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में इससे व्यापक संस्थागत बदलाव की शुरुआत होती है।