Delhi EV Policy 2026: दिल्ली में हाइब्रिड कारों को नहीं मिलेगा फायदा, जानिए नई EV पॉलिसी के 10 बड़े बदलाव

Delhi EV Policy 2026 दिल्ली सरकार ने राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए Delhi EV Policy 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नई नीति में सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रोत्साहन (Incentives) केवल बैटरी से चलने वाले शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों (Battery Electric Vehicles) को मिलेगा। हाइब्रिड कारों को किसी भी प्रकार की वित्तीय राहत नहीं दी जाएगी।

सरकार का कहना है कि राजधानी में वायु प्रदूषण कम करने के लिए केवल शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) वाले वाहनों को बढ़ावा देना ही सबसे प्रभावी रास्ता है।

https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-ev-policy-keeps-hybrids-out-includes-3-year-lock-in-period/articleshow/132081827.cms

Delhi EV Policy 2026 की सबसे बड़ी बातें

नई नीति 1 जुलाई 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का लक्ष्य राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ाना और प्रदूषण कम करना है।

नीति के प्रमुख बिंदु—

  • हाइब्रिड कारों को कोई सब्सिडी नहीं।
  • केवल बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन।
  • 3 साल का लॉक-इन पीरियड।
  • ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ।
  • पुराने वाहन स्क्रैप करने पर ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े स्तर पर विस्तार।
  • 2027 से नए इलेक्ट्रिक ऑटो ही पंजीकृत होंगे।
  • 2028 से नए पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद होगा।

Delhi EV Policy 2026 हाइब्रिड कारों को क्यों किया गया बाहर?

ड्राफ्ट नीति में मजबूत हाइब्रिड (Strong Hybrid) कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत तक राहत देने का प्रस्ताव था। लेकिन अंतिम कैबिनेट बैठक में इसे हटा दिया गया।

सरकार का मानना है कि हाइब्रिड वाहन अभी भी पेट्रोल इंजन का उपयोग करते हैं, जबकि बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह शून्य टेलपाइप उत्सर्जन करते हैं। इसलिए सरकारी सहायता केवल उन्हीं वाहनों को दी जाएगी जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं।

3 साल का लॉक-इन पीरियड क्या है?

नई नीति के तहत यदि कोई व्यक्ति सरकारी सब्सिडी लेकर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है तो वह वाहन तीन साल तक दूसरे राज्य में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का लाभ केवल दिल्ली में वाहन उपयोग करने वाले लोगों को मिले और लोग केवल सब्सिडी लेने के लिए वाहन खरीदकर दूसरे राज्यों में न बेच दें।

₹1 लाख तक मिलेगा स्क्रैपेज इंसेंटिव

यदि कोई वाहन मालिक अपना पुराना BS-IV या उससे पुराना वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में जमा करता है और उसके बाद नई इलेक्ट्रिक कार खरीदता है, तो उसे ₹1 लाख तक का स्क्रैपेज इंसेंटिव मिल सकता है।

हालांकि यह लाभ सीमित संख्या में पात्र आवेदकों को ही मिलेगा और निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।

₹30 लाख तक की EV पर रोड टैक्स पूरी तरह माफ

नई नीति के तहत दिल्ली में पंजीकृत ₹30 लाख तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर—

  • 100% रोड टैक्स माफी
  • 100% रजिस्ट्रेशन शुल्क माफी

का प्रावधान किया गया है। इससे इलेक्ट्रिक कार खरीदने की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

2027 और 2028 की बड़ी समय-सीमा

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध योजना भी बनाई है।

1 जनवरी 2027 से

  • केवल इलेक्ट्रिक ऑटो और इलेक्ट्रिक मालवाहक तीनपहिया वाहनों का नया पंजीकरण होगा।

1 अप्रैल 2028 से

  • नए पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद होगा।
  • केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।

चार्जिंग नेटवर्क पर भी बड़ा निवेश

सरकार अगले कुछ वर्षों में हजारों सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना पर काम करेगी। इसके अलावा बैटरी स्वैपिंग, बैटरी रीसाइक्लिंग और EV इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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क्या बदलेगी दिल्ली की परिवहन व्यवस्था?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है। साथ ही राजधानी में वाहन प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि हाइब्रिड वाहन उद्योग को इस फैसले से झटका लग सकता है क्योंकि उन्हें किसी प्रकार का सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। दूसरी ओर शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों के लिए यह नीति बड़ा अवसर साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

Delhi EV Policy 2026 राजधानी की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लेकर आई है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भविष्य पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों का है। हाइब्रिड तकनीक को प्रोत्साहन सूची से बाहर रखकर सरकार ने शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है।

यदि नीति सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में दिल्ली देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मॉडल के रूप में उभर सकती है।

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