Monsoon 2026: जून में 40% कम बारिश के बाद जुलाई में भी संकट? जानिए IMD का बड़ा अपडेट

Monsoon 2026 भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई महीने के लिए मानसून का जो पूर्वानुमान जारी किया है, वह उम्मीदों के विपरीत है। साल 2026 का मानसून सीजन शुरुआत से ही काफी सुस्त नजर आ रहा है। 1901 के बाद से भारत ने इस साल पांचवां सबसे सूखा जून देखा है, जहां सामान्य से करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जुलाई का महीना जून की इस कमी को पूरा कर पाएगा? आइए जानते हैं IMD के लेटेस्ट डेटा और इसके पीछे की वजहों को।

Monsoon 2026 जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, जुलाई महीने में देश भर में औसत मासिक बारिश सामान्य से कम (यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज – LPA के 94% से कम) रहने की संभावना है।

आमतौर पर जुलाई का महीना पूरे चार महीने के मानसून सीजन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि इसी दौरान देश में सबसे ज्यादा बारिश होती है।

जून 2026 के आंकड़े: क्यों थम गई मानसून की रफ्तार?

  • 40% की भारी कमी: जून के महीने में देश को जहां सामान्य रूप से 165.3 mm बारिश मिलनी चाहिए थी, वहां केवल 99.5 mm बारिश ही दर्ज की गई।
  • पांचवां सबसे सूखा जून: मौसम विभाग के 125 साल से अधिक के इतिहास (1901 से) में यह पांचवां मौका है जब जून का महीना इतना सूखा रहा है। इससे पहले 2009 और 2014 में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई थी।

आखिर क्यों रूठ गया मानसून? विलेन बना ‘Super El Niño’

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मानसून के कमजोर रहने की मुख्य वजह प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो’ (El Niño) प्रभाव है।

क्या होता है अल नीनो? अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है जिसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक हवाओं पर पड़ता है, जिससे भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर हो जाता है।

इसके अलावा, इंडियन ओशन डिपोल (IOD) की स्थिति भी फिलहाल ‘न्यूट्रल’ यानी तटस्थ बनी हुई है, जिसके कारण यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद नहीं कर पा रही है।

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भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

भारत की लगभग आधी खेती आज भी पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर है। जुलाई में कम बारिश की चेतावनी से कई क्षेत्रों में चिंता की लकीरें खिंच गई हैं:

  1. खरीफ फसलों की बुवाई में देरी: केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कम बारिश के कारण धान (Rice), कपास (Cotton), मक्का (Maize) और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले लगभग 22% पिछड़ गई है।
  2. जल स्तर में गिरावट: देश के प्रमुख जलाशयों और बांधों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में 25% तक कम आंका गया है। यदि जुलाई के उत्तरार्ध (Second Half) में बारिश नहीं सुधरी, तो सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है।
  3. महंगाई का खतरा: फसलों का उत्पादन प्रभावित होने से आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल (Food Inflation) आ सकता है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

क्या कहीं राहत की उम्मीद है?

IMD के अनुसार, भले ही पूरे महीने का औसत कम रहने वाला है, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह (7 से 10 दिनों) में देश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-ईस्ट इंडिया और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ सकता है, जिससे किसानों को बुवाई का शुरुआती मौका मिलेगा। हालांकि, जुलाई के दूसरे भाग में सूखा बढ़ने की अधिक आशंका है।

निष्कर्ष: अब आगे क्या?

जून और जुलाई के इस सूखे रुख को देखते हुए मौसम विभाग ने सभी संबंधित विभागों, किसानों और जल प्रबंधकों को अभी से जल संरक्षण (Water Conservation) और आकस्मिक कृषि योजनाएं (Contingency Plans) तैयार रखने की सलाह दी है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे कम पानी लेने वाली या कम समय में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें।

मौसम की अगली बड़ी परीक्षा अगस्त और सितंबर में होगी, जिसके लिए IMD जुलाई के अंत में नया आउटलुक जारी करेगा।

आपकी राय: क्या आपके क्षेत्र में मानसून ने दस्तक दी है? कम बारिश की इस चुनौती से निपटने के लिए आपके पास क्या उपाय हैं? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!

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